गज़ल
ठोकरें भूलकर जमाने की,
अब तो आदत सी है मुस्कुराने की
ज़िन्दगी इक गीत ही तो है
जरूरत है बस गुनगुनाने की ।
अब तो आदत सी है मुस्कुराने की
ज़िन्दगी इक गीत ही तो है
जरूरत है बस गुनगुनाने की ।
इतनी दूर हम निकल आये,
इश्क़ की दिलकश दुनिया से
लौट कर जाते भी तो क्यूँ जाते
जब वजह ही न हो लौट जाने की ।
रोज़ाना की भागदौड़ में
उलझी है इस कदर दुनिया,
दिल का टूटना भी मुनासिब न रहा
किसी को फुर्सत कहाँ रूठने-मनाने की ।
इश्क़ की दिलकश दुनिया से
लौट कर जाते भी तो क्यूँ जाते
जब वजह ही न हो लौट जाने की ।
रोज़ाना की भागदौड़ में
उलझी है इस कदर दुनिया,
दिल का टूटना भी मुनासिब न रहा
किसी को फुर्सत कहाँ रूठने-मनाने की ।
तेरा मिलना अब जरूरी न रहा
तु न मेरी ताकत न कमजोरी जो रहा,
और तुझसे कुछ कहते भी तो क्या कहते
जब कोई बात न हो हक़ जताने की ।
वक़्त की चाल समझ ले "कोमल"
परवाह न कर आने-जाने की,
ठोकरें भूलकर ज़माने की
आदत बना ले अब मुस्कुराने की ॥
"कोमल"
तु न मेरी ताकत न कमजोरी जो रहा,
और तुझसे कुछ कहते भी तो क्या कहते
जब कोई बात न हो हक़ जताने की ।
वक़्त की चाल समझ ले "कोमल"
परवाह न कर आने-जाने की,
ठोकरें भूलकर ज़माने की
आदत बना ले अब मुस्कुराने की ॥
"कोमल"
4 टिप्पणियां:
बहुत ही जबरदस्त 👌👌 अब तो मैंनेआमैंने सी बना ली है मुस्कुराने की🙂
🙏🏻🙏🏻
Dhanyawad 🙏🏻
Mast ekdum👍
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