शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

Aadat

गज़ल 

ठोकरें भूलकर जमाने की,
    अब तो आदत सी है मुस्कुराने की 
ज़िन्दगी इक गीत ही तो है 
    जरूरत है बस गुनगुनाने की । 

इतनी दूर हम निकल आये,
    इश्क़ की दिलकश दुनिया से 
लौट कर जाते भी तो क्यूँ जाते 
    जब वजह ही न हो लौट जाने की । 

रोज़ाना की भागदौड़ में 
    उलझी है इस कदर दुनिया,
दिल का टूटना भी मुनासिब न रहा 
    किसी को फुर्सत कहाँ रूठने-मनाने की । 

तेरा मिलना अब जरूरी न रहा
    तु न मेरी ताकत न कमजोरी जो रहा,
और तुझसे कुछ कहते भी तो क्या कहते 
    जब कोई बात न हो हक़ जताने की । 

वक़्त की चाल समझ ले "कोमल"
    परवाह न कर आने-जाने की,
ठोकरें भूलकर ज़माने की 
    आदत बना ले अब मुस्कुराने की ॥ 

                                                          "कोमल"

4 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

बहुत ही जबरदस्त 👌👌 अब तो मैंनेआमैंने सी बना ली है मुस्कुराने की🙂

Unknown ने कहा…

🙏🏻🙏🏻

Unknown ने कहा…

Dhanyawad 🙏🏻

बेनामी ने कहा…

Mast ekdum👍