@शादी
कर्म नया है, धर्म नया है
जीवन में यह पर्व नया है
ले आशीष बड़े बूढ़ों का
निभाना तुझको फ़र्ज़ नया है ।
जीवन का नया अध्याय
पुरुष-प्रकृति का संगम है
दिया कपिल ने ज्ञान ये
करना तुझको अनुगम है ।
अनुशरण करना ज्येष्ठ-श्रेष्ठ का
तो सुख की छाया रहेगी
घर-आँगन तुम्हारे सदा, खुशियों की
पावन-शीतल समीर बहेगी ।
नवागत को होगी आस तुमसे,
जीवन में होगा विकास तुमसे,
स्पंदन ह्रदय के समझ
करना मनोरथ सिद्धि प्रयास मनसे ।
सभी मित्रों का प्रेम सदा तुमपर बरसे,
"तुम" दो तन एक प्राण हो, यह कामना है "कोमल" दिल से ॥
कर्म नया है, धर्म नया है
जीवन में यह पर्व नया है
ले आशीष बड़े बूढ़ों का
निभाना तुझको फ़र्ज़ नया है ।
जीवन का नया अध्याय
पुरुष-प्रकृति का संगम है
दिया कपिल ने ज्ञान ये
करना तुझको अनुगम है ।
अनुशरण करना ज्येष्ठ-श्रेष्ठ का
तो सुख की छाया रहेगी
घर-आँगन तुम्हारे सदा, खुशियों की
पावन-शीतल समीर बहेगी ।
नवागत को होगी आस तुमसे,
जीवन में होगा विकास तुमसे,
स्पंदन ह्रदय के समझ
करना मनोरथ सिद्धि प्रयास मनसे ।
सभी मित्रों का प्रेम सदा तुमपर बरसे,
"तुम" दो तन एक प्राण हो, यह कामना है "कोमल" दिल से ॥
"कोमल"