रविवार, 27 अप्रैल 2014

@शादी

@शादी  

कर्म नया है, धर्म  नया है 
जीवन में यह पर्व नया है 
ले आशीष बड़े बूढ़ों का 
निभाना तुझको फ़र्ज़ नया है । 

जीवन का नया अध्याय 

पुरुष-प्रकृति का संगम है 
दिया कपिल ने ज्ञान ये 
करना तुझको अनुगम है ।

अनुशरण करना ज्येष्ठ-श्रेष्ठ का 

तो सुख की  छाया रहेगी 
घर-आँगन तुम्हारे सदा,  खुशियों की 
पावन-शीतल समीर बहेगी । 

नवागत को होगी आस तुमसे,

जीवन में होगा विकास तुमसे,
स्पंदन ह्रदय के समझ 
करना मनोरथ सिद्धि प्रयास मनसे । 

सभी मित्रों का प्रेम सदा तुमपर बरसे,

"तुम" दो तन एक प्राण हो, यह कामना है "कोमल" दिल से ॥ 


"कोमल"