मंगलवार, 10 मई 2011

Ik shor hai

इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में
इक आह है घनघोर सी धड़कनों में,
कभी-कभी मैं यूँ ही देखता रहता हूँ आसमां
कभी-कभी मैं यूँ ही सोचता हूँ जाने तु कहाँ |

तु ख़्वाब है मेरी आस है मेरी बंदगी
तु अनबुझी मेरी प्यास है कब बुझेगी,
कभी-कभी मैं यूँ ही भीड़ में भी तन्हा रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तुझको ही माँगा करता हूँ |

इक शोर है सब ओर है मेरी रूह में
इक आह है पुरज़ोर है मेरी रूह में,
कभी-कभी मैं यूँ ही तड़पता हूँ अँधेरी रातों में
कभी-कभी मैं यूँ ही ढूंढता हूँ तुझे बीती बातों में |

तु प्यार है मेरी यार है मेरी ज़िन्दगी
तु साथ है मेरे पास है रहूँ कहीं भी,
कभी-कभी मैं यूँ ही उन लम्हों को थामे रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तेरी चाह में जिंदा रहता हूँ |

इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में......
---------------कोमल-------------------

5 टिप्‍पणियां:

Geeta ने कहा…

rachana to acchhi hai he ,sur ke sath mindblowing...

Deepika Vaidya ने कहा…

Wowh... amazing to read...now i feel how amazing would be listening it.. :)

Vikas Shrivastava ने कहा…

Thankyou Geeta Madam,
Thankyou Deeps...suno jaldi :)

Gaurav ने कहा…

~great one... nice :)

Unknown ने कहा…

Thanks Bro!