रविवार, 27 मार्च 2011

have to think....to feel

 
इक रात बीती तन्हा तो ख्याल आया
यूँ ही करवटें बदलते मन में इक उबाल आया
कि कुछ पाने के लिए बहत कुछ खोना पड़ता है
मुस्कराने के लिए भी कभी कभी रोना पड़ता है
दर्द की इन्तहा जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी  सोचना पड़ता है |

वो सच हो या झूठ, किया फिर भी ऐतबार दिल ने
रास्ता कटता रहा इंतज़ार-ए-मंजिल में
कि अक्स की चाहत में आइनों को जोड़ना पड़ता है
सीप की ख्वाहिश में खुद को डुबोना पड़ता है
टूटते सपनों की कसक जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |

जानता हूँ के ये बस यूँ ही उथल पुथल है मन की
ऊंची-नीची आड़ी-तिरछी चाल है जीवन की
कि प्यार के अलगाव में पलकों को भिगोना पड़ता है
अजनबी भीड़ में फिर खुद को संजोना पड़ता है
तन्हाई का दंश जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |

...................... कोमल .................................

4 टिप्‍पणियां:

Vikas Shrivastava ने कहा…

Inspired by one of the line said by my good friend...

Geeta ने कहा…

bahut dard bhara hai, aapko dekh kar koi nahi kah sakta ki muskurate chehre ke pichhe itana dard chhupa hai.

बेनामी ने कहा…

so nice word dil ko chu gai

Unknown ने कहा…

जो कभी ऐसे दौर से गुज़रा हो वो ही एहसास कर सकता है। nice lines..👌👌