इक रात बीती तन्हा तो ख्याल आया
यूँ ही करवटें बदलते मन में इक उबाल आया
कि कुछ पाने के लिए बहत कुछ खोना पड़ता है
मुस्कराने के लिए भी कभी कभी रोना पड़ता है
दर्द की इन्तहा जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |
वो सच हो या झूठ, किया फिर भी ऐतबार दिल ने
रास्ता कटता रहा इंतज़ार-ए-मंजिल में
कि अक्स की चाहत में आइनों को जोड़ना पड़ता है
सीप की ख्वाहिश में खुद को डुबोना पड़ता है
टूटते सपनों की कसक जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |
जानता हूँ के ये बस यूँ ही उथल पुथल है मन की
ऊंची-नीची आड़ी-तिरछी चाल है जीवन की
कि प्यार के अलगाव में पलकों को भिगोना पड़ता है
अजनबी भीड़ में फिर खुद को संजोना पड़ता है
तन्हाई का दंश जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |
...................... कोमल .................................