इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में
इक आह है घनघोर सी धड़कनों में,
कभी-कभी मैं यूँ ही देखता रहता हूँ आसमां
कभी-कभी मैं यूँ ही सोचता हूँ जाने तु कहाँ |
तु ख़्वाब है मेरी आस है मेरी बंदगी
तु अनबुझी मेरी प्यास है कब बुझेगी,
कभी-कभी मैं यूँ ही भीड़ में भी तन्हा रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तुझको ही माँगा करता हूँ |
इक शोर है सब ओर है मेरी रूह में
इक आह है पुरज़ोर है मेरी रूह में,
कभी-कभी मैं यूँ ही तड़पता हूँ अँधेरी रातों में
कभी-कभी मैं यूँ ही ढूंढता हूँ तुझे बीती बातों में |
तु प्यार है मेरी यार है मेरी ज़िन्दगी
तु साथ है मेरे पास है रहूँ कहीं भी,
कभी-कभी मैं यूँ ही उन लम्हों को थामे रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तेरी चाह में जिंदा रहता हूँ |
इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में......
---------------कोमल-------------------