मंगलवार, 10 मई 2011

Ik shor hai

इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में
इक आह है घनघोर सी धड़कनों में,
कभी-कभी मैं यूँ ही देखता रहता हूँ आसमां
कभी-कभी मैं यूँ ही सोचता हूँ जाने तु कहाँ |

तु ख़्वाब है मेरी आस है मेरी बंदगी
तु अनबुझी मेरी प्यास है कब बुझेगी,
कभी-कभी मैं यूँ ही भीड़ में भी तन्हा रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तुझको ही माँगा करता हूँ |

इक शोर है सब ओर है मेरी रूह में
इक आह है पुरज़ोर है मेरी रूह में,
कभी-कभी मैं यूँ ही तड़पता हूँ अँधेरी रातों में
कभी-कभी मैं यूँ ही ढूंढता हूँ तुझे बीती बातों में |

तु प्यार है मेरी यार है मेरी ज़िन्दगी
तु साथ है मेरे पास है रहूँ कहीं भी,
कभी-कभी मैं यूँ ही उन लम्हों को थामे रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तेरी चाह में जिंदा रहता हूँ |

इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में......
---------------कोमल-------------------

Intezaar

और कितना करूँ इंतज़ार तेरा, ऐ शमा
अँधेरी राहों में डर सा बहुत लगता है,
तुझे क्यों नहीं एहसास होता खौफ-ए-दिल का मेरे
आता जाता हर कोई भेड़ियों सा लगता है |

और कितना करूँ इंतज़ार तेरा, ऐ ज़िन्दगी
सफ़र-ए-जिंदगानी में तन्हा सा चल रहा हूँ,
सारी दुनिया को जो रास्ता दिखाती है
मैं उसी रौशनी के ताप में जल रहा हूँ |

और कितना करूँ इंतज़ार तेरा, ऐ  ख़ुशी
बस पल पल बीतती धडकनें सुना करता हूँ,
दुनिया से कितना दूर हूँ आकर ज़रा देख ले
रात-दिन बस तेरे ही ख्व़ाब बुना करता हूँ |
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अब और नहीं जीना है मन मार के ये ज़िन्दगी
अब और नहीं मरना है तिल तिल मिलती मौत भी,
क्या करूँ तू ही बता, तू ही दे जीने की वजह
मैं तो कर ही रहा हूँ, और करता रहूँगा इंतज़ार तेरा |

-----------------कोमल--------------------- 

रविवार, 27 मार्च 2011

have to think....to feel

 
इक रात बीती तन्हा तो ख्याल आया
यूँ ही करवटें बदलते मन में इक उबाल आया
कि कुछ पाने के लिए बहत कुछ खोना पड़ता है
मुस्कराने के लिए भी कभी कभी रोना पड़ता है
दर्द की इन्तहा जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी  सोचना पड़ता है |

वो सच हो या झूठ, किया फिर भी ऐतबार दिल ने
रास्ता कटता रहा इंतज़ार-ए-मंजिल में
कि अक्स की चाहत में आइनों को जोड़ना पड़ता है
सीप की ख्वाहिश में खुद को डुबोना पड़ता है
टूटते सपनों की कसक जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |

जानता हूँ के ये बस यूँ ही उथल पुथल है मन की
ऊंची-नीची आड़ी-तिरछी चाल है जीवन की
कि प्यार के अलगाव में पलकों को भिगोना पड़ता है
अजनबी भीड़ में फिर खुद को संजोना पड़ता है
तन्हाई का दंश जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |

...................... कोमल .................................