गुरुवार, 15 जुलाई 2010

Shree...


"श्री"

आदि-अनंत काल से,
          समय की तीव्र चाल से,
सूर्य के प्रकाश से,
          अपार-अचल आकाश से,

प्रकृति के निर्माण से,
          जीवों में बसे प्राण से,
फूलों में निहित महक से,
          पंछियों की मधुर चहक से,

सागर की गहराई से,
          पर्वतों की ऊँचाई से,
बिजली की चपलता से,
          चाँद की शीतलता से,

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सर्वोपरि है आज भी,
जीवन की शुरुआत "श्री"

---------------कोमल--------------

2 टिप्‍पणियां:

nidhi ने कहा…

very nice....

Unknown ने कहा…

Thanks alot...
awesome poem..
my mother-in-law has appreciated alot.