हाथ फिर किसी ने दोस्ती का बढ़ाया है
कोमल भावनाओं को न किसी ने ठुकराया है |
नाचीज़ की दोस्ती ठुकरा न दे कहीं
इस डर से किसी को न बताया है |
दिल की आवाज़ दिलवाले ही सुन सकते हैं
और किसी ने कहाँ इस पर गौर फ़रमाया है |\
गर बहक जाए तो थाम ले,
ये फ़र्ज़ तो सिर्फ सच्चे दोस्त ने निभाया है |
-------------कोमल----------------
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