रविवार, 23 मई 2010

Bhavnayein....


भावनाएं मन की, कागज पर उतारी न गयी
तुम जो गए ज़िन्दगी से, ज़िन्दगी गुजारी न गयी |

हर अरमान अश्कों के साथ बहा दिए
पर तुम्हे पाने की ख्वाहिश हमारी न गयी |

तुमने रुख मोड़ दिया दिल के फ़साने का 
हम तड़प के ही रह गए, पर सवारी न गयी |

दामन छुड़ा के तुम सोचते हो, दिल से चले गए
इतनी गहराई तक तो कोई कटारी न गयी |

इलाज चाहे जो कर लो इस नामुराद का
दिल से तेरे इश्क की बीमारी न गयी |

...................कोमल......................

2 टिप्‍पणियां:

बालमुकुन्द अग्रवाल,पेंड्रा ने कहा…

बहुत सुंदर.

Deepika Vaidya ने कहा…

I feel so touched..loved each n evry word of the poem.