भावनाएं मन की, कागज पर उतारी न गयी
तुम जो गए ज़िन्दगी से, ज़िन्दगी गुजारी न गयी |
हर अरमान अश्कों के साथ बहा दिए
पर तुम्हे पाने की ख्वाहिश हमारी न गयी |
तुमने रुख मोड़ दिया दिल के फ़साने का
हम तड़प के ही रह गए, पर सवारी न गयी |
दामन छुड़ा के तुम सोचते हो, दिल से चले गए
इतनी गहराई तक तो कोई कटारी न गयी |
इलाज चाहे जो कर लो इस नामुराद का
दिल से तेरे इश्क की बीमारी न गयी |
...................कोमल......................
2 टिप्पणियां:
बहुत सुंदर.
I feel so touched..loved each n evry word of the poem.
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