शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

Sirf Tum...


आँखें बंद करता हूँ
   तो तेरी तस्वीर नज़र आती है,
आँखें जब खुलती हैं
   तो तुम में मेरी तकदीर नज़र आती है |

ख्यालों के आँगन को
   सपनों से सजाती है,
तुमसे मेरी जिंदगी 
   अबीर नज़र आती है |

तुम्हारी इन अदाओं पे
   मर-मिटे हैं हम,
जो कभी चंचल
   तो कभी गंभीर नज़र आती है |

गुमनामी के अंधेरों में
   अकेली पड़ी थी ज़िन्दगी,
जब से मिले हो तुम
   चाहनेवालों की एक भीड़ नज़र आती है |

===========कोमल============


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