आँखें बंद करता हूँ
तो तेरी तस्वीर नज़र आती है,
आँखें जब खुलती हैं
तो तुम में मेरी तकदीर नज़र आती है |
ख्यालों के आँगन को
सपनों से सजाती है,
तुमसे मेरी जिंदगी
अबीर नज़र आती है |
तुम्हारी इन अदाओं पे
मर-मिटे हैं हम,
जो कभी चंचल
तो कभी गंभीर नज़र आती है |
गुमनामी के अंधेरों में
अकेली पड़ी थी ज़िन्दगी,
जब से मिले हो तुम
चाहनेवालों की एक भीड़ नज़र आती है |
===========कोमल============
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