शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

"Shikayat"

"शिकायत"

"तुमसे जुदा क्या हुए, हर अपने ने मुंह फेर लिया 
दुश्मन की हसरत क्या करते, जब अपनों ने ही ढेर किया |"

"और जो कुछ बाकी रहा, कसर वो पूरी तुम कर दो
जाते-जाते कम से कम, अपने दीवाने पर इक नज़र कर दो |"

"मिलने की तमन्ना लिए, उम्र की सांझ ढल रही
दिन-दिन, पल-पल ऐसा बीता, जैसे की सांस थम गयी |"

"दुनिया से हंस के मिला, क्या बताऊँ उन्हें उदासी मेरी
सब समझते रहे खुशमिजाज़ मुझे, न समझे कोई बेबसी मेरी |"

"चौराहे पर लाकर छोड़ते, तो भी एक राह की उम्मीद थी
उस गली में लाकर छोड़ा, जहाँ चारो तरफ ईंट थी |"

"फिर भी इंतज़ार जाने किस पल का है, जो यह सांस टूटती नहीं
सारी दुनिया से बेगाने हुए, पर तुमसे मिलने की आस छूटती नहीं |"

------------------------कोमल----------------------------

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