"शिकायत"
"तुमसे जुदा क्या हुए, हर अपने ने मुंह फेर लिया
दुश्मन की हसरत क्या करते, जब अपनों ने ही ढेर किया |"
"और जो कुछ बाकी रहा, कसर वो पूरी तुम कर दो
जाते-जाते कम से कम, अपने दीवाने पर इक नज़र कर दो |"
"मिलने की तमन्ना लिए, उम्र की सांझ ढल रही
दिन-दिन, पल-पल ऐसा बीता, जैसे की सांस थम गयी |"
"दुनिया से हंस के मिला, क्या बताऊँ उन्हें उदासी मेरी
सब समझते रहे खुशमिजाज़ मुझे, न समझे कोई बेबसी मेरी |"
"चौराहे पर लाकर छोड़ते, तो भी एक राह की उम्मीद थी
उस गली में लाकर छोड़ा, जहाँ चारो तरफ ईंट थी |"
"फिर भी इंतज़ार जाने किस पल का है, जो यह सांस टूटती नहीं
सारी दुनिया से बेगाने हुए, पर तुमसे मिलने की आस छूटती नहीं |"
------------------------कोमल----------------------------
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