ख्वाहिशों की मौत पर
कौन से अश्क बहाऊँ |
दिल टूटा है, अरमां लुटे हैं
नयनों के अश्रु-घट फूटे हैं
नयनों के अश्रु-घट फूटे हैं
दिल कहता है कोई गीत सुनाऊँ
ख्वाहिशों की मौत पर
कौन से अश्क बहाऊँ |
उन पर ही छोड़ी थी ज़िन्दगी अपनी
सोचा था समझेंगे मेरे जज्बातों को,
और वो कहते हैं कि उन्हें ही भूल जाऊं
ख्वाहिशों की मौत पर
कौन से अश्क बहाऊँ |
तमन्ना थी लुटाने की, उन पर हर खुशियाँ
तमन्ना थी कि हमारा प्यार, देखती ये दुनिया
अब हाल-ए-दिल मैं किसे सुनाऊँ
ख्वाहिशों की मौत पर
कौन से अश्क बहाऊँ |
***************कोमल*******************
2 टिप्पणियां:
wah wah wah... this also nice one
thanks Aahna...
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