शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

Khwahishon Ki....


ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

दिल टूटा है, अरमां लुटे हैं
नयनों के अश्रु-घट फूटे हैं
दिल कहता है कोई गीत सुनाऊँ 
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

उन पर ही छोड़ी थी ज़िन्दगी अपनी
सोचा था समझेंगे मेरे जज्बातों को,
और वो कहते हैं कि उन्हें ही भूल जाऊं
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

तमन्ना थी लुटाने की, उन पर हर खुशियाँ
तमन्ना थी कि हमारा प्यार, देखती ये दुनिया
अब हाल-ए-दिल मैं किसे सुनाऊँ
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

***************कोमल*******************

2 टिप्‍पणियां:

bloggingmyexperience ने कहा…

wah wah wah... this also nice one

बेनामी ने कहा…

thanks Aahna...