काँटों को है इंतज़ार तेरा
छुपकर जो बैठे हैं फूलों के पीछे,
ठोकर लगाने के लिए पत्थर भी हैं
हर कदम संभल कर रखना है तुझे |
चुभा कोई काँटा, खुद निकालना होगा
अश्कों को नयनो तक ही बांधना होगा,
ठोकर लगी तो खुद संभलना होगा
संभल कर आगे फिर चलना होगा |
चलते-चलते तुम थक जाओगे शायद
कोमल पग तुम्हारे छिल जायेंगे शायद,
किसी कदम पर विश्वास डगमगाएगा
नयनों में अश्रु सागर उमड़ जायेगा,
लगेगा की तुम हो गलत राह पर
और शायद तुम्हारा रास्ता ही बदल जायेगा |
नहीं मेरे दोस्त! तू हिम्मत ना हारना
यही तेरी अग्नि-परीक्षा की घड़ी है,
तेरी मेहनत रंग ला रही है
और देख तेरी मंजिल चार कदम पर खड़ी है,
तेरे चाहनेवाले जहाँ तुझको मिलेंगे
जिनको तुझसे उम्मीदें बड़ी है |
दृढ-निश्चय के सहारे आगे बढ़ते रहना
ग़मों की आंधी को संयम से सहना
तुझे तेरी मंजिल जरुर मिलेगी
तुझे तेरी मंजिल जरुर मिलेगी |
-------------कोमल--------------
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