शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

Khwahishon Ki....


ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

दिल टूटा है, अरमां लुटे हैं
नयनों के अश्रु-घट फूटे हैं
दिल कहता है कोई गीत सुनाऊँ 
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

उन पर ही छोड़ी थी ज़िन्दगी अपनी
सोचा था समझेंगे मेरे जज्बातों को,
और वो कहते हैं कि उन्हें ही भूल जाऊं
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

तमन्ना थी लुटाने की, उन पर हर खुशियाँ
तमन्ना थी कि हमारा प्यार, देखती ये दुनिया
अब हाल-ए-दिल मैं किसे सुनाऊँ
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

***************कोमल*******************

Sirf Tum...


आँखें बंद करता हूँ
   तो तेरी तस्वीर नज़र आती है,
आँखें जब खुलती हैं
   तो तुम में मेरी तकदीर नज़र आती है |

ख्यालों के आँगन को
   सपनों से सजाती है,
तुमसे मेरी जिंदगी 
   अबीर नज़र आती है |

तुम्हारी इन अदाओं पे
   मर-मिटे हैं हम,
जो कभी चंचल
   तो कभी गंभीर नज़र आती है |

गुमनामी के अंधेरों में
   अकेली पड़ी थी ज़िन्दगी,
जब से मिले हो तुम
   चाहनेवालों की एक भीड़ नज़र आती है |

===========कोमल============


शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

"Shikayat"

"शिकायत"

"तुमसे जुदा क्या हुए, हर अपने ने मुंह फेर लिया 
दुश्मन की हसरत क्या करते, जब अपनों ने ही ढेर किया |"

"और जो कुछ बाकी रहा, कसर वो पूरी तुम कर दो
जाते-जाते कम से कम, अपने दीवाने पर इक नज़र कर दो |"

"मिलने की तमन्ना लिए, उम्र की सांझ ढल रही
दिन-दिन, पल-पल ऐसा बीता, जैसे की सांस थम गयी |"

"दुनिया से हंस के मिला, क्या बताऊँ उन्हें उदासी मेरी
सब समझते रहे खुशमिजाज़ मुझे, न समझे कोई बेबसी मेरी |"

"चौराहे पर लाकर छोड़ते, तो भी एक राह की उम्मीद थी
उस गली में लाकर छोड़ा, जहाँ चारो तरफ ईंट थी |"

"फिर भी इंतज़ार जाने किस पल का है, जो यह सांस टूटती नहीं
सारी दुनिया से बेगाने हुए, पर तुमसे मिलने की आस छूटती नहीं |"

------------------------कोमल----------------------------

Kaanto Ko Hai Intezaar....



काँटों को है इंतज़ार तेरा
छुपकर जो बैठे हैं फूलों के पीछे,
ठोकर लगाने के लिए पत्थर भी हैं
हर कदम संभल कर रखना है तुझे |

चुभा कोई काँटा, खुद निकालना होगा
अश्कों को नयनो तक ही बांधना होगा,
ठोकर लगी तो खुद संभलना होगा
संभल कर आगे फिर चलना होगा |

चलते-चलते तुम थक जाओगे शायद
कोमल पग तुम्हारे छिल जायेंगे शायद,
किसी कदम पर विश्वास डगमगाएगा 
नयनों में अश्रु सागर उमड़ जायेगा,
लगेगा की तुम हो गलत राह पर
और शायद तुम्हारा रास्ता ही बदल जायेगा |
 
नहीं मेरे दोस्त! तू हिम्मत ना हारना
यही तेरी अग्नि-परीक्षा की घड़ी है,
तेरी मेहनत रंग ला रही है
और देख तेरी मंजिल चार कदम पर खड़ी है,
तेरे चाहनेवाले जहाँ तुझको मिलेंगे 
जिनको तुझसे उम्मीदें बड़ी है |

दृढ-निश्चय के सहारे आगे बढ़ते रहना 
ग़मों की आंधी को संयम से सहना
तुझे तेरी मंजिल जरुर मिलेगी
तुझे तेरी मंजिल जरुर मिलेगी |

-------------कोमल--------------

सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

Ummeed - Meri Pehli Kavita

उम्मीद

सपनों के शहर में जी रहे हैं आज सब
अपलक नज़रों में कुछ विश्वास अब भी है,
कभी न कभी तो स्थिति बदलेगी
दिलों में यह एहसास अब भी है |
अपलक नज़रों में ...........................


आज भ्रष्टाचार के बीच आम इंसान कैसे जिए
संदेह और अविश्वास के बीच आम इंसान कैसे जिए,
राजदारों को भी समझ नहीं पाते है हम
स्वतंत्र होते हुए हम दास अब भी हैं |
अपलक नज़रों में ...........................

अपने परायों का भेद सभी करते हैं
फिर भी अपनों को छोड़ परायों को अनुसरते हैं,
इंसान के हालात उस जुआरी जैसे हैं
हारने के बाद जिसके हाथों में ताश अब भी है |
अपलक नज़रों में ...........................

कभी तो होगी साँसों को आज़ादी
कभी तो होगी भ्रष्टों की बर्बादी,
उम्मीद लगाए बैठी है, जो सहते हुए अत्याचार
इस शहर में ऐसे लोगों की आस अब भी है |
अपलक नज़रों में ...........................


कभी न कभी तो स्थिति बदलेगी
दिलों में यह एहसास अब भी है |


-------------कोमल------------

Desire To Achieve

Desire and Think
    How to Achieve,

Think and Act
    For what to Collect,

Act and Be Smart
    That where to drive Cart,

Be Smart and Be Nice
    B'coz only then U can Rise,

Nice and Wise
    will Make many Choice(s),

Wiser only Achieve
    So DESIRE TO ACHIEVE