सोमवार, 27 दिसंबर 2010

Love Again....

Flowers, so Beautiful! Sky, so Clear!
All the happiness of Life, for me is near
I’d not met any….. Any moment of Disdain,
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.


I’m not alone, got so many friends
May be Life-long, not just like a trend,
They are with me “in Shadow & in Rain”
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.


Appreciation & Praises, made me so Proud
Achievements with traces, took me Ninth Cloud,
Freckles on my face got hid in the “Vain”
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.


Wishes fulfilled, Desires satisfied
Radiance escalated whenever I’d cried,
Divinity holds my Hand when Heart was in Pain
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.

--------------------Komal----------------------

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

Pain of Missing.....

Pain of missing.... the forehead kissing
and the pleasure of spending time with her,

Adrenaline arising, Emotions enticing
Her love was support for my falling rapture.

Lub-dub vibrating, Brims osculating
Wrapping of arms takes us closer,

Oculus conversing, Sensations surging
The Ocean of love was got bit deeper.

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Scenario changing, when life was ranging
She moved away far and farther,

Scratched from starting, calls it new beginning
I'm alone and she got her partner.

Now,
Confidence shaken, but heart is not taking
That life is abyss when she is not here,

Moments hurting, situations flirtling
But still 'm escorting (life) like an 'Usher'.

Pain of missing.... the forehead kissing.....


.............................Komal............................

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

Shree...


"श्री"

आदि-अनंत काल से,
          समय की तीव्र चाल से,
सूर्य के प्रकाश से,
          अपार-अचल आकाश से,

प्रकृति के निर्माण से,
          जीवों में बसे प्राण से,
फूलों में निहित महक से,
          पंछियों की मधुर चहक से,

सागर की गहराई से,
          पर्वतों की ऊँचाई से,
बिजली की चपलता से,
          चाँद की शीतलता से,

.....................................
.....................................
सर्वोपरि है आज भी,
जीवन की शुरुआत "श्री"

---------------कोमल--------------

मंगलवार, 13 जुलाई 2010

Ehsaas!!!

ना जाने कितनी बार तुम्हारा दिल दुखाया होगा,
ना जाने कैसी-कैसी बातों से तुम्हे सताया होगा,

मेरी किसी शरारत पर जब तुमने मार लगाई होगी,
मुझे यकीं है तुन्हारी भी आँखें भर आई होगी |

ऊँगली थमा मुझे जब चलना सिखाया होगा,
ना जाने किन-किन ठोकरों से मुझे बचाया होगा,

मेरे बस्ते में किताबे रख जब 'स्कूल' में छोड़ा होगा,
मुझे यकीं है तुमने अपने दिल को मुश्किल से रोका होगा |

खाने-पीने के मेरे नखरे पर जब मुझे समझाया होगा,
ना जाने किस-किस लालच से मुझे रिझाया होगा |

मेरे बड़े हो जाने पर जब मुझे 'कॉलेज' में भेजी होगी,
मुझे यकीं है तुमको लाखों चिंता घेरी होगी |

कम 'नंबर' लाने पर जब डांट लगाई होगी,
ना जाने क्या-क्या फिक्रें तुम्हारे मन में आई होगी,

मेरी शादी करवाई जब तुम कितना रोई होगी,
मुझे यकीं है ख़ुशी तुम्हारी मुझसे दुगुनी होगी |

---------
मुझे तेरे दर्द और प्रेम का एहसास तब हुआ,
मुझमें नए जीवन का संचार जब हुआ,

अब मैं तुमसे और भी प्यार करने लगी हूँ,
माँ!!!
"मैं आज माँ बनी हूँ" |


----------------कोमल--------------

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

Hold My Hand...My Friend

हाथ फिर किसी ने दोस्ती का बढ़ाया है
कोमल भावनाओं को न किसी ने ठुकराया है |

नाचीज़ की दोस्ती ठुकरा न दे कहीं
इस डर से किसी को न बताया है |

दिल की आवाज़ दिलवाले ही सुन सकते हैं
और किसी ने कहाँ इस पर गौर फ़रमाया है |\

गर बहक जाए तो थाम ले,
ये फ़र्ज़ तो सिर्फ सच्चे दोस्त ने निभाया है |



-------------कोमल----------------

रविवार, 23 मई 2010

Bhavnayein....


भावनाएं मन की, कागज पर उतारी न गयी
तुम जो गए ज़िन्दगी से, ज़िन्दगी गुजारी न गयी |

हर अरमान अश्कों के साथ बहा दिए
पर तुम्हे पाने की ख्वाहिश हमारी न गयी |

तुमने रुख मोड़ दिया दिल के फ़साने का 
हम तड़प के ही रह गए, पर सवारी न गयी |

दामन छुड़ा के तुम सोचते हो, दिल से चले गए
इतनी गहराई तक तो कोई कटारी न गयी |

इलाज चाहे जो कर लो इस नामुराद का
दिल से तेरे इश्क की बीमारी न गयी |

...................कोमल......................

Bachpan

"बचपन"

माँ की ऊँगली पकड़ कर चलना
   मिटटी में, धूल में, उलटना-पलटना
पेड़ों पर चड़ना, कभी पेड़ों से गिरना
   याद है मुझको वो बचपन का मचलना |

खाने को मिलने पर खाने से भागना,
और न मिलने पर, खाने को मांगना
दिन में सोना और रातों को जागना,
याद है मुझको वो सबको सताना |

वो परियों की, राजा की, जंगल की कहानी,
वो खिलौनों में, गुड्डे-गुड़ियों में मस्त रहना,
वो दोस्तों से, भाई-बहनों से लड़ना-झगड़ना,
याद है मुझको वो बचपन का चहकना |
....................................

मिलता वो बचपन फिर, तो अच्छा होता
दुनिया से दूर, अपनी दुनिया में मैं मस्त होता,
पर क्या करूँ कि ये अब सपने हैं सारे
बढ़ चले हम आगे, छूट गए किनारे |

***********कोमल*************

Antarman

अंतर्मन

बात बात में घर टूटते हैं 
बात बात में अश्रु घट फूटते हैं
ऐसा क्यों होता है 'कोमल'
अपने अंतर्मन से ये हम कब पूछते हैं |

खिलते फूल मुरझा जाते हैं
सपनों में खुद को, उलझा पाते हैं,
विरोध-बाग़ की ओर वो क्यों झुकते हैं
अपने अंतर्मन से ये हम कब पूछते हैं |

'तेरे-मेरे' के खेल में सब फंसे हुए हैं
माया के सर्प से सब डसे हुए हैं,
अंधकार की ओर बढ़ते कदम, कब रुकते हैं
अपने अंतर्मन से ये हम कब पूछते हैं |

==========कोमल==========

शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

Khwahishon Ki....


ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

दिल टूटा है, अरमां लुटे हैं
नयनों के अश्रु-घट फूटे हैं
दिल कहता है कोई गीत सुनाऊँ 
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

उन पर ही छोड़ी थी ज़िन्दगी अपनी
सोचा था समझेंगे मेरे जज्बातों को,
और वो कहते हैं कि उन्हें ही भूल जाऊं
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

तमन्ना थी लुटाने की, उन पर हर खुशियाँ
तमन्ना थी कि हमारा प्यार, देखती ये दुनिया
अब हाल-ए-दिल मैं किसे सुनाऊँ
ख्वाहिशों की मौत पर 
   कौन से अश्क बहाऊँ |

***************कोमल*******************

Sirf Tum...


आँखें बंद करता हूँ
   तो तेरी तस्वीर नज़र आती है,
आँखें जब खुलती हैं
   तो तुम में मेरी तकदीर नज़र आती है |

ख्यालों के आँगन को
   सपनों से सजाती है,
तुमसे मेरी जिंदगी 
   अबीर नज़र आती है |

तुम्हारी इन अदाओं पे
   मर-मिटे हैं हम,
जो कभी चंचल
   तो कभी गंभीर नज़र आती है |

गुमनामी के अंधेरों में
   अकेली पड़ी थी ज़िन्दगी,
जब से मिले हो तुम
   चाहनेवालों की एक भीड़ नज़र आती है |

===========कोमल============


शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

"Shikayat"

"शिकायत"

"तुमसे जुदा क्या हुए, हर अपने ने मुंह फेर लिया 
दुश्मन की हसरत क्या करते, जब अपनों ने ही ढेर किया |"

"और जो कुछ बाकी रहा, कसर वो पूरी तुम कर दो
जाते-जाते कम से कम, अपने दीवाने पर इक नज़र कर दो |"

"मिलने की तमन्ना लिए, उम्र की सांझ ढल रही
दिन-दिन, पल-पल ऐसा बीता, जैसे की सांस थम गयी |"

"दुनिया से हंस के मिला, क्या बताऊँ उन्हें उदासी मेरी
सब समझते रहे खुशमिजाज़ मुझे, न समझे कोई बेबसी मेरी |"

"चौराहे पर लाकर छोड़ते, तो भी एक राह की उम्मीद थी
उस गली में लाकर छोड़ा, जहाँ चारो तरफ ईंट थी |"

"फिर भी इंतज़ार जाने किस पल का है, जो यह सांस टूटती नहीं
सारी दुनिया से बेगाने हुए, पर तुमसे मिलने की आस छूटती नहीं |"

------------------------कोमल----------------------------

Kaanto Ko Hai Intezaar....



काँटों को है इंतज़ार तेरा
छुपकर जो बैठे हैं फूलों के पीछे,
ठोकर लगाने के लिए पत्थर भी हैं
हर कदम संभल कर रखना है तुझे |

चुभा कोई काँटा, खुद निकालना होगा
अश्कों को नयनो तक ही बांधना होगा,
ठोकर लगी तो खुद संभलना होगा
संभल कर आगे फिर चलना होगा |

चलते-चलते तुम थक जाओगे शायद
कोमल पग तुम्हारे छिल जायेंगे शायद,
किसी कदम पर विश्वास डगमगाएगा 
नयनों में अश्रु सागर उमड़ जायेगा,
लगेगा की तुम हो गलत राह पर
और शायद तुम्हारा रास्ता ही बदल जायेगा |
 
नहीं मेरे दोस्त! तू हिम्मत ना हारना
यही तेरी अग्नि-परीक्षा की घड़ी है,
तेरी मेहनत रंग ला रही है
और देख तेरी मंजिल चार कदम पर खड़ी है,
तेरे चाहनेवाले जहाँ तुझको मिलेंगे 
जिनको तुझसे उम्मीदें बड़ी है |

दृढ-निश्चय के सहारे आगे बढ़ते रहना 
ग़मों की आंधी को संयम से सहना
तुझे तेरी मंजिल जरुर मिलेगी
तुझे तेरी मंजिल जरुर मिलेगी |

-------------कोमल--------------

सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

Ummeed - Meri Pehli Kavita

उम्मीद

सपनों के शहर में जी रहे हैं आज सब
अपलक नज़रों में कुछ विश्वास अब भी है,
कभी न कभी तो स्थिति बदलेगी
दिलों में यह एहसास अब भी है |
अपलक नज़रों में ...........................


आज भ्रष्टाचार के बीच आम इंसान कैसे जिए
संदेह और अविश्वास के बीच आम इंसान कैसे जिए,
राजदारों को भी समझ नहीं पाते है हम
स्वतंत्र होते हुए हम दास अब भी हैं |
अपलक नज़रों में ...........................

अपने परायों का भेद सभी करते हैं
फिर भी अपनों को छोड़ परायों को अनुसरते हैं,
इंसान के हालात उस जुआरी जैसे हैं
हारने के बाद जिसके हाथों में ताश अब भी है |
अपलक नज़रों में ...........................

कभी तो होगी साँसों को आज़ादी
कभी तो होगी भ्रष्टों की बर्बादी,
उम्मीद लगाए बैठी है, जो सहते हुए अत्याचार
इस शहर में ऐसे लोगों की आस अब भी है |
अपलक नज़रों में ...........................


कभी न कभी तो स्थिति बदलेगी
दिलों में यह एहसास अब भी है |


-------------कोमल------------

Desire To Achieve

Desire and Think
    How to Achieve,

Think and Act
    For what to Collect,

Act and Be Smart
    That where to drive Cart,

Be Smart and Be Nice
    B'coz only then U can Rise,

Nice and Wise
    will Make many Choice(s),

Wiser only Achieve
    So DESIRE TO ACHIEVE

रविवार, 31 जनवरी 2010

Love....

O'Dear! We are the loveliest pair.

Let us explore our love,
Why to think about world
Let us be divine to each other
And get above the words.
B'coz Dear! We are the loveliest pair.

Just accept me, in front of all
& Believe,
My life will be yours in one call
Don't be depressed of any matter
Our love will rise & never fall.
B'coz Dear! We are the loveliest pair.

See the dreams & they will be true
Love will be always between Me & You
Whenever be alone, think of me
I will never make your life feel blue.
B'coz Dear! We are the loveliest pair.

...........................VS...............................

Something

"Something was there in the heart of God
which makes him to make the Man,
It is special for us to live as broad
and not to waste the life span."

"Something is there in the heart of Man
which makes him to make new World,
But which makes the life meaningful one
Love, Humanity... are that few words"