शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

Aadat

गज़ल 

ठोकरें भूलकर जमाने की,
    अब तो आदत सी है मुस्कुराने की 
ज़िन्दगी इक गीत ही तो है 
    जरूरत है बस गुनगुनाने की । 

इतनी दूर हम निकल आये,
    इश्क़ की दिलकश दुनिया से 
लौट कर जाते भी तो क्यूँ जाते 
    जब वजह ही न हो लौट जाने की । 

रोज़ाना की भागदौड़ में 
    उलझी है इस कदर दुनिया,
दिल का टूटना भी मुनासिब न रहा 
    किसी को फुर्सत कहाँ रूठने-मनाने की । 

तेरा मिलना अब जरूरी न रहा
    तु न मेरी ताकत न कमजोरी जो रहा,
और तुझसे कुछ कहते भी तो क्या कहते 
    जब कोई बात न हो हक़ जताने की । 

वक़्त की चाल समझ ले "कोमल"
    परवाह न कर आने-जाने की,
ठोकरें भूलकर ज़माने की 
    आदत बना ले अब मुस्कुराने की ॥ 

                                                          "कोमल"

Shakti Vandan

शक्ति वंदन

कुछ शब्दों में बांध सके ऐसा उसका रूप कहाँ
कुछ कहने पर उसे जान सके ऐसा उसका स्वरुप कहाँ,
चेहरे पर खिलती मुस्कानों को, घने केशों के घटखानो को 
उजियारे में पहचान सके, ऐसी सूरज में धूप कहाँ ॥ 

किलकारी से घर भरने वाली कभी वो लाडली बेटी है 

खुशियों से घर तर कर दे वो, बहू बनकर सुख देती है 
पर उसके,
दिल में उठते अरमानों को, सपनों में पलते अफसानों को 
शीतलता में भी कुछ भान सके, ऐसा चाँद में शैत्य कहाँ ॥ 

घर चलाती गृहणी बनकर, रणक्षेत्र में काली है 

देश चलाती ४९ की शक्ति, बात उसकी बड़ी निराली है
पर उसके,
मन के कोने अनजानो को, आँखों से छलके पैमानों को 
लहरो में पलट अनुमान सके, ऐसी सागर में थाह कहाँ ॥ 

सबने उसको शोषित किया, वो पोषित भविष्य को करती आई 

सबने उसको अबला समझ, वो प्राणों को जनती आई]
सहती चुप रहकर हर तानों को, अपने बनते बेगानो को 
बोझ उठा इतना चट्टान सके, ऐसा पर्वत में सामर्थ्य कहाँ ॥ 

कर नमन उस शक्ति को 'कोमल', जिसने तेरा निर्माण किया 

दे अपनी ममता की छाया, प्रकृति को जिसने प्राण दिया,
दिया हमेशा लिया कभी ना, ऐसा और महान कहाँ 
सुख की छाया, प्रेम की मूरत, करते उसे प्रणाम सदा ॥ 

कुछ शब्दों में बांध सके ऐसा उसका रूप कहाँ
कुछ कहने पर उसे जान सके ऐसा उसका स्वरुप कहाँ,... 

                                 "कोमल"

रविवार, 27 अप्रैल 2014

@शादी

@शादी  

कर्म नया है, धर्म  नया है 
जीवन में यह पर्व नया है 
ले आशीष बड़े बूढ़ों का 
निभाना तुझको फ़र्ज़ नया है । 

जीवन का नया अध्याय 

पुरुष-प्रकृति का संगम है 
दिया कपिल ने ज्ञान ये 
करना तुझको अनुगम है ।

अनुशरण करना ज्येष्ठ-श्रेष्ठ का 

तो सुख की  छाया रहेगी 
घर-आँगन तुम्हारे सदा,  खुशियों की 
पावन-शीतल समीर बहेगी । 

नवागत को होगी आस तुमसे,

जीवन में होगा विकास तुमसे,
स्पंदन ह्रदय के समझ 
करना मनोरथ सिद्धि प्रयास मनसे । 

सभी मित्रों का प्रेम सदा तुमपर बरसे,

"तुम" दो तन एक प्राण हो, यह कामना है "कोमल" दिल से ॥ 


"कोमल" 

मंगलवार, 10 मई 2011

Ik shor hai

इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में
इक आह है घनघोर सी धड़कनों में,
कभी-कभी मैं यूँ ही देखता रहता हूँ आसमां
कभी-कभी मैं यूँ ही सोचता हूँ जाने तु कहाँ |

तु ख़्वाब है मेरी आस है मेरी बंदगी
तु अनबुझी मेरी प्यास है कब बुझेगी,
कभी-कभी मैं यूँ ही भीड़ में भी तन्हा रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तुझको ही माँगा करता हूँ |

इक शोर है सब ओर है मेरी रूह में
इक आह है पुरज़ोर है मेरी रूह में,
कभी-कभी मैं यूँ ही तड़पता हूँ अँधेरी रातों में
कभी-कभी मैं यूँ ही ढूंढता हूँ तुझे बीती बातों में |

तु प्यार है मेरी यार है मेरी ज़िन्दगी
तु साथ है मेरे पास है रहूँ कहीं भी,
कभी-कभी मैं यूँ ही उन लम्हों को थामे रहता हूँ
कभी-कभी मैं यूँ ही तेरी चाह में जिंदा रहता हूँ |

इक शोर है ख़ामोश सी धड़कनों में......
---------------कोमल-------------------

Intezaar

और कितना करूँ इंतज़ार तेरा, ऐ शमा
अँधेरी राहों में डर सा बहुत लगता है,
तुझे क्यों नहीं एहसास होता खौफ-ए-दिल का मेरे
आता जाता हर कोई भेड़ियों सा लगता है |

और कितना करूँ इंतज़ार तेरा, ऐ ज़िन्दगी
सफ़र-ए-जिंदगानी में तन्हा सा चल रहा हूँ,
सारी दुनिया को जो रास्ता दिखाती है
मैं उसी रौशनी के ताप में जल रहा हूँ |

और कितना करूँ इंतज़ार तेरा, ऐ  ख़ुशी
बस पल पल बीतती धडकनें सुना करता हूँ,
दुनिया से कितना दूर हूँ आकर ज़रा देख ले
रात-दिन बस तेरे ही ख्व़ाब बुना करता हूँ |
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अब और नहीं जीना है मन मार के ये ज़िन्दगी
अब और नहीं मरना है तिल तिल मिलती मौत भी,
क्या करूँ तू ही बता, तू ही दे जीने की वजह
मैं तो कर ही रहा हूँ, और करता रहूँगा इंतज़ार तेरा |

-----------------कोमल--------------------- 

रविवार, 27 मार्च 2011

have to think....to feel

 
इक रात बीती तन्हा तो ख्याल आया
यूँ ही करवटें बदलते मन में इक उबाल आया
कि कुछ पाने के लिए बहत कुछ खोना पड़ता है
मुस्कराने के लिए भी कभी कभी रोना पड़ता है
दर्द की इन्तहा जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी  सोचना पड़ता है |

वो सच हो या झूठ, किया फिर भी ऐतबार दिल ने
रास्ता कटता रहा इंतज़ार-ए-मंजिल में
कि अक्स की चाहत में आइनों को जोड़ना पड़ता है
सीप की ख्वाहिश में खुद को डुबोना पड़ता है
टूटते सपनों की कसक जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |

जानता हूँ के ये बस यूँ ही उथल पुथल है मन की
ऊंची-नीची आड़ी-तिरछी चाल है जीवन की
कि प्यार के अलगाव में पलकों को भिगोना पड़ता है
अजनबी भीड़ में फिर खुद को संजोना पड़ता है
तन्हाई का दंश जब लगे दिल को तड़पाने
तो एहसास करने के लिए भी सोचना पड़ता है |

...................... कोमल .................................

सोमवार, 27 दिसंबर 2010

Love Again....

Flowers, so Beautiful! Sky, so Clear!
All the happiness of Life, for me is near
I’d not met any….. Any moment of Disdain,
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.


I’m not alone, got so many friends
May be Life-long, not just like a trend,
They are with me “in Shadow & in Rain”
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.


Appreciation & Praises, made me so Proud
Achievements with traces, took me Ninth Cloud,
Freckles on my face got hid in the “Vain”
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.


Wishes fulfilled, Desires satisfied
Radiance escalated whenever I’d cried,
Divinity holds my Hand when Heart was in Pain
But O’ My Princess!
            I’ve never felt the Love Again.

--------------------Komal----------------------